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बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मालिश कैसे की जाती है?
नवजात शिशॠके अचà¥à¤›à¥‡ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठजितना जरूरी मां का दूध होता है, उतना ही जरूरी होता है उसकी नियमित रूप से मालिश करना। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में शिशॠकी मालिश की परंपरा सदियों से चली आ रही है। वहीं, अब डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¥€ शिशॠकी मालिश करने के लिठकहते हैं। यह न सिरà¥à¤« शिशॠके अचà¥à¤›à¥‡ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥ के लिठफायदेमंद है, बलà¥à¤•ि यह मां का बचà¥à¤šà¥‡ को पà¥à¤¯à¤¾à¤° करने का बेहतरीन तरीका à¤à¥€ है।
नवजात शिशॠकी मालिश उसकी मां या घर का कोई अनà¥à¤¯ सदसà¥à¤¯ करता है। वहीं, आजकल कà¥à¤› लोग शिशॠकी मालिश के लिठविशेष रूप से किसी महिला को नियà¥à¤•à¥à¤¤ करते हैं। इस दौरान बचà¥à¤šà¥‡ की मालिश के लिठबने तेल या लोशन का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर शिशॠको सहलाया जाता है। इससे शिशॠका शारीरिक विकास तो होता ही है, साथ ही अà¤à¤¿à¤à¤¾à¤µà¤• और शिशॠके बीच बेहतर तालमेल à¤à¥€ बनता है।
शिशॠकी मालिश करने से कà¥à¤¯à¤¾ लाठहोता है?
शिशॠकी नियमित रूप से मालिश करने से उसे कई लाठहोते हैं, जिनके बारे में हम नीचे बता रहे हैं। आइठजानते हैं कि शिशॠकी मालिश करने से कà¥à¤¯à¤¾ लाठहोते हैं (1) :
बचà¥à¤šà¥‡ को नींद अचà¥à¤›à¥€ आती है : अचà¥à¤›à¥€ नींद आने में मालिश अहम à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¥€ है। सोने से पहले शिशॠकी मालिश करने से शिशॠके शरीर में अधिक मेलाटोनिन उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होता है। यह हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ अचà¥à¤›à¥€ नींद के लिठजरूरी माना जाता है।
मांसपेशियों को आराम मिलता है और तनाव कम होता है : मालिश करने से शिशॠका तनाव à¤à¥€ कम होता है। मालिश से शरीर में खà¥à¤¶à¥€ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ कराने वाला हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‰à¤•à¥à¤¸à¤¿à¤¨ जारी होता है और तनाव उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करने वाला हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ कम होने लगता है। वहीं, मालिश से मांसपेशियों को आराम à¤à¥€ मिलता है।
मानसिक और सामाजिक विकास बढ़ाने में सहायक : अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ में यह बात साबित हो चà¥à¤•ी है कि बचà¥à¤šà¥‡ को किया सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ उसके मानसिक और सामाजिक विकास पर असर डालता है।
तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ होता है : शिशॠकी मालिश करने से उसका तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° (नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤®) उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ होता है और मांसपेशियों के तालमेल में à¤à¥€ सà¥à¤§à¤¾à¤° होता है।
पाचन, रकà¥à¤¤ संचार और सांस लेने में फायदा : शिशॠकी मालिश करने से शिशॠका रोना कम हो जाता है और उसका पाचन व रकà¥à¤¤ संचार दà¥à¤°à¥à¤¸à¥à¤¤ होता है। साथ ही उसे शà¥à¤µà¤¸à¤¨ संबंधी फायदे à¤à¥€ होते हैं। इसके अलावा, शिशॠकी मालिश करने से गैस व कबà¥à¤œ जैसी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ दूर होती हैं।
आइà¤, अब जानते हैं कि शिशॠकी मालिश कब शà¥à¤°à¥‚ करनी चाहिà¤à¥¤
शिशॠकी मालिश कब शà¥à¤°à¥‚ करें?
विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ की मानें तो जनà¥à¤® के चार सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ बाद शिशॠकी मालिश शà¥à¤°à¥‚ की जा सकती है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस दौरान शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ ठीक से विकसित हो जाती है और नाà¤à¤¿ ठूंठà¤à¥€ टूटकर ठीक हो जाती है। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि शिशॠकी नाà¤à¤¿ ठूंठटूटकर गिरने और सूखने के बाद ही आप उसके पेट पर मालिश करें (2)।
शिशॠकी मालिश करने का सबसे अचà¥à¤›à¤¾ समय
शिशॠकी मालिश करने का सबसे अचà¥à¤›à¤¾ समय वो होता है, जब वो न तो थका हà¥à¤† हो और न ही à¤à¥‚खा हो। à¤à¤¸à¥‡ में वो मालिश का अचà¥à¤›à¥€ तरह से आनंद उठा पाà¤à¤—ा। आप उसकी मालिश दिन में कà¤à¥€ à¤à¥€ कर सकते हैं। इसके अलावा, उसकी मालिश उसे नहालाने के समयानà¥à¤¸à¤¾à¤°, सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ और सोने व जागने के समय के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° तय कर सकती हैं।
संà¤à¤µ हो तो आप शिशॠकी दैनिक कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का रोजाना के लिठà¤à¤• निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ कà¥à¤°à¤® बना लें। उदाहरण के तौर पर पहले आप शिशॠकी मालिश करें, फिर उसे नहलाà¤à¤‚ और बाद में उसे सà¥à¤²à¤¾ दें। à¤à¤¸à¤¾ करने से शिशॠदिनचरà¥à¤¯à¤¾ को समà¤à¤¨à¥‡ लगेगा।
बेशक, यह पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ लंबी है और शिशॠके लिठइसे अपनाना थोड़ा मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस बीच उसे फिर से à¤à¥‚ख लग सकती है। इसलिà¤, शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में बचà¥à¤šà¥‡ की मालिश और नहाने के बीच के समयांतराल को कम रखें। आप रात को सोने से पहले à¤à¥€ शिशॠकी मालिश कर सकती हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे उसकी थकान उतरती है और उसे नींद अचà¥à¤›à¥€ आती है। वहीं, अगर शिशॠअधिक रो रहा है, तो शाम के समय मालिश करना फायदेमंद हो सकता है।
शिशॠकी मालिश कैसे करनी चाहि�
शिशॠकी मालिश करना दिखने में आसान लगता है, लेकिन इसे काफी सावधानी से करना चाहिà¤à¥¤ नवजात शिशॠका शरीर बेहद नाजà¥à¤• होता है, इसलिठमालिश का सही तरीका पता रहना जरूरी है। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ छह महीने में तेज दबाव डालकर मालिश न करें। नीचे हम बता रहे हैं कि शिशॠकी मालिश कैसे करनी चाहिà¤à¥¤
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤ª 1- शिशॠको मालिश के लिठतैयार करें
शिशॠकी मालिश शà¥à¤°à¥‚ करने से पहले आपको उसे इसके लिठतैयार करना होगा। à¤à¤¸à¥‡ में जरूरी है शिशॠशांत और अचà¥à¤›à¥‡ मूड में रहे। इसके लिठआप शिशॠकी हथेलियों पर हलà¥à¤•ा-हलà¥à¤•ा तेल लगाà¤à¤‚ और फिर पेट व कानों के पीछे तेल लगाà¤à¤‚। à¤à¤¸à¤¾ करने से वो इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को समà¤à¤¨à¥‡ लगेगा। अगर इस बीच वो रोने लगे और हाथ-पैर à¤à¤Ÿà¤•ने लगे, तो समठजाà¤à¤‚ कि वो अà¤à¥€ मालिश करवाने के लिठतैयार नहीं है। वहीं, अगर इस दौरान वो शांत रहे, तो मालिश शà¥à¤°à¥‚ कर देनी चाहिà¤à¥¤
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤ª 2- शिशॠके पैरों की मालिश
जब लगे कि बचà¥à¤šà¤¾ मालिश के लिठतैयार है, तो सबसे पहले उसके पैरों की मालिश करें। आप अपनी हथेलियों पर थोड़ा तेल लें और उसके तलवों पर हलà¥à¤•े हाथों से मालिश करें। उसके पैरों की उंगलियों और à¤à¤¡à¤¼à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर मालिश करें। फिर हथेली से पैर के नीचे और ऊपर हलà¥à¤•ा हाथ फेरें। फिर धीरे-धीरे पंजों और पैरों के नीचे अंगूठे को गोल घà¥à¤®à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ मालिश करें।
फिर à¤à¤• पैर को ऊपर उठाà¤à¤‚ और टखने पर हलà¥à¤•े-हलà¥à¤•े हाथ फेरें। फिर हाथ को जांघों पर ले जाà¤à¤‚। à¤à¤¸à¥‡ ही आप दूसरे पैर पर à¤à¥€ मालिश करें।
अब हाथों से बचà¥à¤šà¥‡ की जांघों को हलà¥à¤•े-हलà¥à¤•े दबाà¤à¤‚।
अब शिशॠकी टांगों को घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ से मोड़ते हà¥à¤ घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ को हलà¥à¤•े हाथों से पेट पर दबाà¤à¤‚। à¤à¤¸à¤¾ करने से शिशॠके पेट से गैस बाहर निकल जाà¤à¤—ी।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤ª 3- शिशॠके हाथों की मालिश
पैरों के बाद शिशॠके हाथों की मालिश करें। इसके लिठशिशॠके हाथ पकड़ें और उसकी हथेलियों पर हाथ फेरें।
अब तेल से उसकी हथेलियों से लेकर उंगलियों के पोरों तक हलà¥à¤•ी मालिश करें।
अब धीरे से बचà¥à¤šà¥‡ के हाथों को मोड़ें और धीरे-धीरे उसके हाथ के पिछले हिसà¥à¤¸à¥‡ से कलाई तक मालिश करें।
अब कलाई पर हाथों को गोल-गोल घà¥à¤®à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ (जैसे चूड़ी पहनाई जाती है) मालिश करें।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤ª 4- शिशॠके सीने और कंधों की मालिश
अब बारी आती है शिशॠके सीने और कंधों की मालिश करने की। इसके लिठआप शिशॠके दोनों कंधों के से सीने तक धीरे-धीरे मालिश करें।
इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को दो से तीन बार दोहराà¤à¤‚।
फिर हलà¥à¤•े हाथों से सीने के बीच में हाथ रखते हà¥à¤ बाहर की तरफ मालिश करें।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤ª 5- शिशॠके पेट की मालिश
पेट काफी नाजà¥à¤• होता है, इसलिठउस पर दबाव न डालें। आप सीने के नीचे से पेट की मालिश करना शà¥à¤°à¥‚ करें।
फिर दोनों हाथों को गोल घà¥à¤®à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ शिशॠके पेट और नाà¤à¤¿ के पास मालिश करें।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤ª 6- शिशॠके सिर और चेहरे की मालिश
इसके लिठआप शिशॠके माथे पर तरà¥à¤œà¤¨à¥€ उंगली रखें और हलà¥à¤•े दबाव से उसके चेहरे पर मालिश करना शà¥à¤°à¥‚ करें।
फिर ठोड़ी से अपनी उंगलियों को गालों की ओर ले जाते हà¥à¤ सरà¥à¤•à¥à¤²à¤° मोशन में मालिश करें। दो से तीन बार इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को दोहराà¤à¤‚।
इसके बाद बचà¥à¤šà¥‡ के बालों की जड़ों में तेल लगाकर इस तरह मालिश करें, जैसे शैंपू करते हैं। बचà¥à¤šà¥‡ का सिर बेहद नाजà¥à¤• होता है, इसलिठबेहद हलà¥à¤•े हाथों से मालिश करें।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤ª 7- शिशॠकी पीठकी मालिश
इसके लिठबचà¥à¤šà¥‡ को पेट के बल लिटाà¤à¤‚ और बचà¥à¤šà¥‡ के हाथों को सामने की ओर रखें।
अब उंगलियों के पोरों को शिशॠकी पीठके ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ पर रखें, फिर गोल-गोल घà¥à¤®à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ नीचे की ओर लेते जाà¤à¤‚। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को दो से तीन बार दोहराते हà¥à¤ बचà¥à¤šà¥‡ की पीठकी माà¥à¤²à¤¿à¤¶ करें। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ पर उंगलियों को न रखें।
मà¥à¤à¥‡ अपने बचà¥à¤šà¥‡ की मालिश कितनी बार करनी चाहिà¤?
कà¥à¤› परिवारों में शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ तीन महीने तक दिन में दो बार शिशॠकी मालिश की जाती है। वहीं, कà¥à¤› लोग शिशॠको नहलाने से पहले या नहलाने के बाद मालिश करते हैं। उसकी कितनी बार मालिश करनी चाहिà¤, इस बारे में ठीक-ठीक बताना मà¥à¤¶à¥à¤•िल है। यह इस पर निरà¥à¤à¤° करता है कि बचà¥à¤šà¥‡ को मालिश का कितना मजा आ रहा है और आपके पास कितना समय है।
शिशॠकी मालिश के लिठकà¥à¤› जरूरी टिपà¥à¤¸ और धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने योगà¥à¤¯ बातें
बचà¥à¤šà¥‡ की मालिश करने से उसके शरीर का विकास ठीक तरह से होता है। इसलिà¤, नीचे हम बेबी मालिश से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ कà¥à¤› खास टिपà¥à¤¸ बता रहे हैं, जो आपके काम आà¤à¤‚गे। इसके अलावा, कà¥à¤› खास बाते बताà¤à¤‚गे जिन पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना जरूरी है :
शिशॠकी मालिश के लिठबहà¥à¤¤ ठंडे तेल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² न करें। अगर ठंड का मौसम है, तो आप तेल को हलà¥à¤•ा गरà¥à¤® कर सकती हैं।
मालिश करते समय आप अपने बचà¥à¤šà¥‡ की आंखों में देखें। इससे बचà¥à¤šà¤¾ आपकी तरफ देखेगा और आप दोनों का रिशà¥à¤¤à¤¾ मजबूत होगा।
तेल मालिश के बाद बचà¥à¤šà¥‡ को कम से कम 10-15 मिनट के बाद ही नहलाà¤à¤‚। इससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देर तक शरीर पर तेल लगा न छोड़ें।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें कि शिशॠकी मालिश करते समय तेल उसकी आंखों में न जाà¤à¥¤ इससे उसकी आंखों में जलन हो सकती है।
मालिश करने के बाद शिशॠको गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी से नहलाà¤à¤‚। इससे तेल अचà¥à¤›à¥€ तरह हट जाà¤à¤—ा।
बचà¥à¤šà¥‡ के à¤à¥‹à¤œà¤¨ और मालिश के बीच 30 से 45 मिनट का अंतराल रखें। खाने या दूध पिलाने के तà¥à¤°à¤‚त बाद मालिश करने से उसे उलà¥à¤Ÿà¥€ हो सकती है।
बचà¥à¤šà¥‡ को चटाई या नरम तौलिये पर लिटाकर मालिश करें।
इस बात का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ जरूर रखें कि बचà¥à¤šà¥‡ का मूड कैसा है। मालिश करते समय शिशॠपूरी तरह से शांत हो और उसका मूड अचà¥à¤›à¤¾ हो, तà¤à¥€ उसकी मालिश करें। à¤à¤¸à¥‡ मालिश न करें कि बचà¥à¤šà¤¾ असहज महसूस करे।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मालिश के लिठखास तेल
बचà¥à¤šà¥‡ की मालिश के लिठसही तेल चà¥à¤¨à¤¨à¤¾ जरूरी है। नीचे हम बता रहे हैं कि आप अपने शिशॠकी मालिश के लिठकिस-किस तेल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकते हैं :
नारियल तेल : शिशॠकी मालिश के लिठनारियल तेल बेहतर विकलà¥à¤ª है। नारियल के तेल में à¤à¤‚टी-फंगल व à¤à¤‚टी-बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² गà¥à¤£ पाठजाते हैं। शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ के लिठयह बेहतर विकलà¥à¤ª है।
जैतून का तेल : जैतून का तेल बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठबहà¥à¤¤ फायदेमंद होता है। सिरà¥à¤« à¤à¤¾à¤°à¤¤ में ही नहीं, बलà¥à¤•ि विदेशों में à¤à¥€ इस तेल को मालिश के लिठइसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है।
बादाम का तेल : आप बादाम के तेल से à¤à¥€ शिशॠकी मालिश कर सकते हैं। बादाम के तेल में विटामिन-ई होता है, जो बचà¥à¤šà¥‡ को पोषण देकर तà¥à¤µà¤šà¤¾ को मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® बनाता है।
सरसों का तेल : मालिश के लिठसरसों का तेल à¤à¥€ फायदेमंद होता है। यह शरीर में गरà¥à¤®à¤¾à¤¹à¤Ÿ लाता है। हालांकि, यह शरीर पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चिकनाहट ला सकता है, इसलिठइसे किसी अनà¥à¤¯ तेल में मिलाकर ही शिशॠकी मालिश करें।
अरंडी का तेल : शिशॠको नहलाने से पहले अरंडी के तेल से मालिश करना फायदेमंद रहता है। यह तà¥à¤µà¤šà¤¾ से रूखापन दूर कर पोषण देता है।
तिल का तेल : तिल का तेल à¤à¥€ शिशॠकी मालिश के लिठइसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है। यह आपको आसानी से बाजार में मिल जाà¤à¤—ा।
सनफà¥à¤²à¤¾à¤µà¤° ऑयल : वहीं, अगर आपके बचà¥à¤šà¥‡ की तà¥à¤µà¤šà¤¾ काफी संवेदनशील है, तो आप सनफà¥à¤²à¤¾à¤µà¤° ऑयल से à¤à¥€ उसकी मालिश कर सकते हैं। इसमें विटामिन-ई और फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होते हैं, जो शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ को पोषण देते हैं।
टी टà¥à¤°à¥€ ऑयल : संवेदनशील तà¥à¤µà¤šà¤¾ वाले बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मालिश के लिठआप टी-टà¥à¤°à¥€ ऑयल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकते हैं। यह तà¥à¤µà¤šà¤¾ को पोषण à¤à¥€ देता है और इसमें à¤à¤‚टीसेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤• गà¥à¤£ à¤à¥€ होते हैं।
बेबी ऑयल: आप बाजार में मौजूद अचà¥à¤›à¥€ गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ वाले बेबी ऑयल से à¤à¥€ बेबी की मालिश कर सकती हैं।
शिशॠकी मालिश कब नहीं करनी चाहि�
अगर शिशॠके शरीर पर रैशेज हैं, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह लिठबिना उसकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर कोई तेल या कà¥à¤°à¥€à¤® न लगाà¤à¤‚। अगर आपको लगे कि किसी तेल के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर कà¥à¤› निशान पड़ रहे हैं, तो इसका इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² रोक देना चाहिà¤à¥¤ à¤à¤¸à¥‡ में आप डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ही मालिश करने का फैसला लें।
वहीं, कà¥à¤› विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ का कहना है कि शिशॠको बà¥à¤–ार होने पर या उसकी तबीयत खराब होने पर मालिश नहीं करनी चाहिà¤à¥¤ दूसरी तरफ कà¥à¤› डॉकà¥à¤Ÿà¤° कहते हैं कि बà¥à¤–ार होने पर हलà¥à¤•ी मालिश करने से शिशॠको दरà¥à¤¦ से राहत मिलती है। à¤à¤¸à¥‡ में बेहतर है कि शिशॠका सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ खराब होने पर या उसे बà¥à¤–ार आने पर मालिश करने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह ले लें। हो सकता है कि इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° मालिश के लिठमना कर दें।
मà¥à¤à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ की मालिश कब बंद करनी चाहिà¤?
शिशॠकी मालिश कब तक करनी चाहिà¤, इसकी कोई निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ आयॠनहीं है। जब तक आप चाहें, तब तक अपने शिशॠकी मालिश कर सकती हैं। हां, आपको यह नोट करना होगा कि आपका शिशॠइसका कितना आनंद उठा पाता है। यह इस बात पर à¤à¥€ निरà¥à¤à¤° करता है कि किस परिवार में कब तक बचà¥à¤šà¥‡ की मालिश की जाती है। कई परिवारों में शिशॠके पांच-छह साल का हो जाने पर à¤à¥€ मालिश करना बंद नहीं किया जाता। इतनी आयॠके बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मालिश सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में तीन से चार बार की जाती है। बहरहाल, आपको शिशॠकी मालिश कब तक करनी है, यह आप पर निरà¥à¤à¤° करता है।
कà¥à¤¯à¤¾ सोते हà¥à¤ बचà¥à¤šà¥‡ की मालिश करना सही है?
जब बचà¥à¤šà¤¾ सो रहा हो, तो उसकी मालिश न ही करें तो बेहतर होगा। सोते समय उसकी मालिश करने से उसकी नींद टूट सकती है और वो चिड़चिड़ा होकर रोने लग सकता है। इसलिà¤, जब बचà¥à¤šà¥‡ की नींद पूरी हो और वो अचà¥à¤›à¥‡ मूड में हो, तà¤à¥€ उसकी मालिश करें।
ये थे शिशॠकी मालिश से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ कà¥à¤› जरूरी सवालों के जवाब, जो आपके काम आà¤à¤‚गे। इन सà¤à¥€ जानकारियों से आपको अपने ननà¥à¤¹à¥‡ की मालिश ठीक से और सही समय पर करने में मदद मिलेगी। हम उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करते हैं कि इस लेख में दी जानकारी आपके काम आठऔर इसका आपको व आपके शिशॠको लाठमिले।
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